CTET/UPTET 2019 Exam – Previous Year Hindi Questions | 30th November 2019

हिंदी भाषा TET परीक्षा का एक महत्वपूर्ण भाग है इस भाग को लेकर परेशान होने की जरुरत नहीं है .बस आपको जरुरत है तो बस एकाग्रता की. ये खंड न सिर्फ CTET Exam (परीक्षा) में एहम भूमिका निभाता है अपितु दूसरी परीक्षाओं जैसे UPTETKVS ,NVSDSSSB आदि में भी रहता है, तो इस खंड में आपकी पकड़, आपकी सफलता में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है.TEACHERSADDA आपके इस चुनौतीपूर्ण सफ़र में हर कदम पर आपके साथ है।
निर्देश ( प्रश्न 1-6): निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये—
विविध प्रांत हैं अपनी-अपनी भाषाके अभिमानी हम,
पर इन सबसे पहले दुनियावालो हिन्दुस्तानी हम।
रहन.सहन में, खान.पान में, भिन्न भले ही हों कितने,
इस मिट्टी को देते आए, मिल-जुलकर कुरबानी हम।
सदियों से कुचले लाखों तूफान हमने पद तल से,
आज झुके कुछ टकराकर तो कल लगते फिर जागे से।
अंडमन से कश्मीर भले ही दूर दिखाई दे कितना,
पर हर प्रांत जुड़ा है अपना अगणित कोमल धागों से।
जिस ओर बढ़ाए पग हमने, हो गई उधर भू नव मंगल।
आजाद वतन के बाशिंदे, हर चरण हमारा है बादल।।
Q1. हम भारतीय जिधर भी अपने कदम बढ़ाते हैं वहाँ
(a) देश स्वतंत्र हो जातें हैं।
(b) शुभ कार्य होते हैं।
(c) क्रांति हो जाती है।
(d) शांति हो जाती हैं।
Q2. ‘पैर’ शब्द का समानार्थी नहीं है?
(a) पद
(b) चरण
(c) नव
(d) पग
Q3. कविता के अनुसार विविधताओं के बीच भी हम एक हैं, क्योंकि सबसे पहले
(a) वीर-बहादुर है।
(b) स्वतंत्र हैं।
(c) स्वाभिमानी हैं।
(d) भारतीय हैं।
Q4. समास की दृष्टि से शेष से भिन्न पद हैं-
(a) खान-पान
(b) मिलना-जुलना
(c) अपनी-अपनी
(d) रहन-सहन
Q5. ‘‘सदियों से कुचले लाखों तूफान हमने पद तल से’’ कथन में ‘तूफान’ का भाव है-
(a) आक्रमण
(b) लड़ाइयाँ
(c) आँधियाँ
(d) कठिनाइयाँ
Q6. ‘अंडमन से कश्मीर’ हैं भारत में
(a) बलिदानी राज्य
(b) क्रांतिकारी राज्य
(c) निकटस्थ राज्य
(d) दूरस्थ राज्य
निर्देश ( प्रश्न 7-10): निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये—
हमारा जीवन जिन मानवीय सिद्धांतों, अनुभवों और सांस्कृतिक संस्कारों के संबल से समस्त सृष्टि के लिए महत्वपूर्ण बना हैं, परोपकार की भावना उन्हीं में एक हैं। मानव को दूसरे मानव के प्रति वैसा ही संवेदनात्मक उत्तरदायित्व निभाना चाहिए, जैसे वह स्वयं के प्रति निभाता है। जीवन को केवल परोपकार, पर सेवा और निःस्वार्थ प्रेम के लिए ही वास्तविक समझना चाहिए क्योंकि नश्वर शरीर जब नष्ट हो जाएगा तो उसके बाद हमारा कुछ भी इस दुनिया के जीवों की स्मृति में नहीं रहेगा। हम जग जीवों की स्मृति में सदा-सदा के लिए तभी बने रह सकते हैं, जब हम अपने नश्वर शरीर को वैचारिक, बौद्धिक और आत्मिक चेतना से पूर्ण कर निःस्वार्थ भाव से स्पयं का जीव सेवा में समर्पित करेंगे।
हमें स्थिरता से और शांतिपूर्वक यह विचार करते रहना चाहिए कि हमारे जीवन का सर्वश्रेष्ठ उद्देश्य और एकमात्र लक्ष्य हमारे द्वारा किया जाने वाला त्याग है। त्याग योग्य व्यक्तित्व प्राप्त करने के लिए गहन तप की आवश्यकता है। त्याग का भाव किसी मनुष्य में साधारण होते हुए नहीं जन्म लेता। इसके लिए मनुष्य को जीवन-जगत और इसके जीवों के संबंध में असाधारण वैचारिक रचनात्मकता अपनाकर निरंतर योग,ध्यान, तप व साधना करनी होगी।उसे इस स्थिति से विचरते हुए विशिष्ट आध्यात्मिक अनुभवों से लैस होना होगा। आवश्यकता होने पर उसे जीवों की वास्तविक सेवा करनी होगी। जब ऐसी विशेष मानवीय परिस्थितियाँ उत्पन्न होंगी, तब ही मानव में त्याग भाव आकार ग्रहण करेगा।

Q7. ‘आध्यात्मिक अनुभवों से लैस’ होना होगा।
रेखंकित शब्द का अर्थ है-
(a) रिक्त
(b) सतर्क
(c) सज्जित
(d) पूर्ण
Q8. ‘आध्यात्मिक’ शब्द का निर्माण किस उपसर्ग की सहायता से हुआ है?
(a) आधि
(b) आध्य
(c) अ
(d) अधि
Q9. रचना की दृष्टि से शेष से भिन्न शब्द को अलग कीजिएः
(a) बौद्धिक
(b) वास्तविक
(c) मालिक
(d) वैचारिक
Q10. शरीर को ‘नश्वर’ कहा जाता है, क्योंकि वह
(a) नाशवान होता है।
(b) छोटा होता है।
(c) अत्यल्प होता है।
(d) अल्पायु होता है।
Solutions:
S1. Ans.(b)
S2. Ans.(c)
S3. Ans.(d)
S4. Ans.(c)
S5. Ans.(d)
S6. Ans.(d)
S7. Ans.(c)
S8. Ans.(d)
S9. Ans.(c)
S10. Ans.(a)

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